मेरी पहेली मोहब्बत
जब से उसे देखा खोया खोया सा रहता हूं न ही भूख लगती है और ना ही प्यास लगती है ऐसा लगता है बस तुम्हें ही देखता रहूं जब भी आंखें बंद करता हूं बस तुम ही तुम दिखाई देती हो ।।
मैं आज तुम्हें भुलाने की पूरी कोशिश करूंगा मैंने किया भी मैंने सोचा मैं सो जाता हूं आंखें बंद किया लेकिन तुमने सपनों में आकर के मुझे जगा दिया क्या करूं मुझे कुछ समझ नहीं आता मैं तुम्हें भुलाने की कोशिश करूंगा ।।
मैं तुम्हें भुलाने के लिए अपने आप को एक अंधकार वाले कमरे में बंद कर लिया फिर भी तुम मुझे साफ साफ नजर आती हो यह क्या हो रहा है मैं नहीं जानता क्यों हो रहा है नहीं जानता ।।
मन ही मन मै सोच रहा था काश तुम्हें देखा ना होता तो शायद आज मेरा यह हाल ना होता मैं तुम्हारी गलती नहीं निकालूंगा गलती मेरी है मैंने तुम्हें देखा ही क्यों काश नहीं देखा होता ।।
मैं कोई शायर तो नहीं बस अपने दिल का हाल बता रहा हूं अगर अच्छा लगे तो इस पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर कीजिएगा आगे की शायरी नेक्स्ट पोस्ट में जरूर लिखूंगा ।। ।। ।।

إرسال تعليق