महात्मा जी का वरदान प्रेरणादायक कहानी Mahatma ji ka Vardan Prernadayak Kahani

 एक छोटे से गांव में मोहन नाम का एक व्यक्ति रहता था वह 1 दिन बाजार गया और वहां से दूध ले कर के आ रहा था लगभग दिन के 11:00 बज चुके थे गर्मी का महीना था तो उसे बहुत गर्मी लगी हुई थी तभी उसने देखा एक महात्मा जी आ रहे हैं और वह बहुत परेशान है बहुत गर्मी उन्हें लग रही थी तभी मोहन ने महात्मा जी से कहा महात्मा जी आपको बहुत प्यास लगी है लीजिए आप पानी पी लीजिए मोहन महात्मा जी को पानी देने लगा तब महात्मा जी ने मोहन से कहा बेटा मैं व्रत रहता हूं मैं खाना नहीं खाता हूं न पानी पीता हूं केवल दूध पीता हूं ओभी कच्चा उबला हुआ नहीं तब मोहन ने कहा महात्मा जी मैं अभी मार्केट से दूध लेकर के आया हूं

महात्मा जी का वरदान प्रेरणादायक कहानी Mahatma ji ka Vardan Prernadayak Kahani
महात्मा जी का वरदान प्रेरणादायक कहानी Mahatma ji ka Vardan Prernadayak Kahani

आप पी लीजिए वह दूध महात्मा जी को दे दिया और महात्मा जी ने दूध पिया उसके बाद महात्मा जी बहुत खुश हुए महात्मा जी ने मोहन से कहा मोहन मैं तुम्हें वरदान देना चाहता हूं बताओ तुम्हें क्या चाहिए मोहन के दिमाग में आया कि मैंने, जो दूध मार्केट से लेकर के आया था वह तो महात्मा जी को दे दिया इन्होंने सारा दूध पी लिया यह सोचकर के मोहन ने महात्मा जी से कहा महात्मा जी आप मुझे वरदान दीजिए कि जब भी मुझे दूध की जरूरत लगे तो जिस भी गाय का मैं दूध निकालना चाहूँ वह गाय मुझे दूध दे दे बिना कुछ मुझसे बोले महात्मा जी ने कहा अवश्य ऐसा ही होगा या वरदान देकर महात्मा जी आगे बढ़ गए और मोहन को विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है लेकिन महात्मा जी ने मोहन से एक बात कही थी और एक घास दिया था और महात्मा जी ने कहा था मोहन से कि अपने घर जाना और इस घास को लगाकर पानी दे देना और यह घास बहुत ही जल्द बड़ी हो जाएगी और इस घास को काट कर के किसी भी गाय को दे देना वह दूध तुम्हें बिना बोले आसानी से दे देगी मोहन ने सोचा चलो पहले मैं देखता हूं ऐसा होता है
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मोहन अपने घर गया और उस घास को अपने घर के पास में जो जमीन पड़ा हुआ था वहां पर उस घास को लगा दिया और जैसे उसने पानी डाला घास देखते ही देखते बड़ी हो गई और मोहन ने तुरंत उस घास को काट लिया जैसे उसने काटा जितना घास को काटा था उतना बड़ी फिर से वह हो गई तुरंत मोहन देखता ही रह गया मोहन ने कहा यह कैसा चमत्कार है मोहन बहुत खुश हो गया था और वह रात होने का इंतजार करने लगा जैसे ही रात हुई वह अपने पड़ोसी के यहां गया और उसकी गाय का दूध निकालने लगा और वह सारा दूध निकाल लिया और दूध लेकर मोहन अपने घर लाया फिर वह बहुत खुश हुआ उसने कहा अब मुझे काम करने की कोई जरूरत नहीं है कोई गाय भैंस लाने की कोई जरूरत नहीं है अब इस घास को भैंस को गाय को जिसको भी दूंगा वह बिना कुछ बोले वह सारा दूध मेरे बाल्टी में गिरा देगी अब मोहन रोज ऐसे ही करने लगा गांव में जितने भी भैंस गाय रहती उनका दूध निकाल लेता और जो लोग अपनी गाय और भैंस को पालते चारा खिलाते उन्हें दूध नहीं मिलता सभी लोग बहुत परेशान हो गए थे सभी लोग सोच रहे थे दुुध गायब कहां हो जा रहा है लोगों को खाली घास मिल रही थी और वह भी घास बहुत अजीब थी लोग अब मार्केट से दूध लेना चालू कर दिए थे तभी एक दिन एक महात्मा जी गांव में आए हुए थे सभी गांव वालों ने उस महात्मा जी को अपनी परेशानी बताई तब महात्मा जी ने कहा वह घास कहां है जो तुम लोगों ने अपने जानवरों के पास पाया है तब एक बंदे ने उस महात्मा जी को वह घास दिखाई तब महात्मा जी ने कहा यह चमत्कारी घास है इस घास को सुघकर गाय अपना दूध ऑटोमेटिक उस इंसान को दे देती है जो घास गाय को यह घास देता है तब सभी गांव वालों ने महात्मा जी से पूछा कहां महात्मा जी कोई उपाय नहीं है इसका तब महात्मा जी ने कहा आपको पता करना होगा कि यह व्यक्ति कौन है और उसके घर पर जाना होगा जिसके घर पर या घास लगी हुई है आप को ढूंढना है अगर या घास मिल जाती है तो इस घास को आप जला दीजिए क्योंकि यह जलाने से ही खत्म होगी और आप लोगों की समस्या भी खत्म हो जाएगी अगर घास नहीं रहेगी तो वह व्यक्ति कभी भी दूध की चोरी नहीं कर पाएगा सभी गांव वालों ने उस घास को ढूंढना चालू कर दिया कई दिनों तक उन लोगों ने ढूंढा घास नहीं मिला और एक दिन वह सभी गांव वाले मोहन के घर से गुजर रहे थे तभी उन्होंने देखा मोहन के घर पर हरी भरी घास लगी हुई है और सभी गांव वाले गए देखें तो वही खास थी सभी गांव वालों ने उसी वक्त उस घास को जलाने लगे तभी मोहन निकला बोला यह क्या कर रहे हो हमारे घर पर आ कर के और हमारी घास चला रहे हो तब सभी गांव वालों ने मोहन को सच्चाई बताई और उस खास को जला दिया मोहन चिल्लाते रह गया कि घास मत जलाओ घास मत चलाओ जब घास जल गई तब सभी गांव वाले मोहन को भला बुरा कहने लगे तब मोहन ने पूरी सच्चाई बताई और मोहन ने कहा मैं लालच में आकर के बहुत बड़ा अपराध कर रहा था मुझे क्षमा कर दीजिए सभी गांव वालों ने उसे माफ कर दिया और कहा आगे से ऐसी कोई गलती मत कीजिएगा तो दोस्तों मैं उम्मीद करता हूं या मोटिवेशनल कहानी आपको कुछ ना कुछ जरूर सिखाई होगी इस कहानी से हमें सीखने को यह मिला कि हमें सच और मेहनत का साथ देना चाहिए हमें कोई भी काम मेहनत से करना चाहिए कभी भी चोरी नहीं करनी चाहिए या ज्यादा दिन तक नहीं चलता है अगर गांव वाले चाहते तो मोहन को जेल भी भेजवा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया उसे एक मौका दिया सुधारने का दोस्तों उम्मीद करता हूं या मोटिवेशनल कहानी आपको अच्छी लगी होगी अगर अच्छी लगी है तो इसे लाइक कीजिए और अपने दोस्तों में व्हाट्सएप फेसबुक पर भी आप शेयर करना चाहते हैं शेयर कीजिए और ऐसी मोटिवेशनल कहानी आगे भी पढ़ने के लिए हमें फॉलो जरूर कीजिएगा और इस कहानी को लाइक करके और हमें कमेंट कर दीजिए एक अच्छा सा क्योंकि जब आप लाइक और कमेंट करते हैं तो हमें खुशी होती है और हम आपके लिए अच्छी अच्छी कहानियां लिखते हैं तो मिलते हैं किसी नेक्स्ट कहानी के साथ

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