दोस्तों जैसा कि आप लोगों को पता ही होगा कि पहले के जमाने में कुआं हुआ करता था लोग कुआँ से पानी भर कर के पीते थे और जो भी खाना-पीना बनाना रहता था सब कुआँ के पानी से सारा काम होता था दोस्तों यह कहानी भी उसी समय की है एक छोटे से गांव में एक कुआं था उसी कुए से सभी लोग पानी भरते थे और अपना जीवन यापन कर रहे थे और जो भी काम पानी से रहता था वह उस कुएं से पानी भर करके वह लोग करते थे कुछ दिनों में उस कुए पर झगड़े का सिलसिला चालू हो गया जब भी गांव की औरतें पानी भरने के लिए आती तो वहां पर पानी भरने के लिए झगड़ा करने लगती कुछ औरतें तो लाइन लगा कर के पानी भर्ती तो कुछ औरतें जबरदस्ती, बोलती हमें लाइन नहीं लगाना है हम बिना लाइन के ही पानी भरेंगे एक दिन की बात है सुबह का समय था सभी औरतें गांव से पानी भरने आई थीं उस कुएं पर और वहां पर झगड़ा करना चालू हो गया तभी वहां पर जो गांव के मुखिया जी थे उनकी पत्नी आई पानी भरने के लिए उन्होंने कहा कि मुझे पानी पहले भरने दो क्योंकि मैं मुखिया की पत्नी हूं इसलिए सबसे पहले पानी में भरूँगी,
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| गोल्डन कुआं प्रेरणादायक कहानी | Golden well inspirational story |
उनकी इस बात पर सभी औरतों में झगड़ा होने लगा और यह देख कर के कुआँ बहुत परेशान हो गया देखते ही देखते उन औरतों के सामने ही कुएं से पानी धीरे-धीरे खत्म होने लगा और उस कुएं का पानी सूख गया सभी लोग आश्चर्य में थे कि आखिर कुए का पानी इतना जल्दी कैसे सूख गया, अभी तो कुआं भरा हुआ था पानी से सभी लोगों ने झगड़ा बंद करके सभी औरतों ने उस कुएं में देखने लगी कि पानी गया कहां धीरे-धीरे बात फैलने लगी और सभी गांव वाले इकट्ठा हुए कुएं में वास्तव में पानी नहीं था सभी ने आकर के देखा उसके बाद उस गांव के मुखिया जी ने कहा अभी तो यह हुआ सुख गया है अभी आप लोगों का झगड़ा भी खत्म हो गया होगा मुझे लगता है कि आप लोगों की झगड़े की वजह से या कुआं भी परेशान हो गया इसलिए अपना पानी सुखा लिया अब आप लोग जब दूर चल करके नदी से पानी लेकर के आओगे तभी आप लोगों को पानी का महत्त्व पता चलेगा गांव के सभी लोग नदी से पानी लाने लगे और उन लोगों का जीवन फिर से अच्छे से बीतने लगा लेकिन परेशानी यह थी कि पानी लाने में नदी से बहुत समय लग जाता था इसलिए सब बहुत ही ज्यादा परेशान थे धीरे-धीरे समय बीतता गया 25 से 30 साल बीत चुके थे, नदी से लोग पानी ला करके अपना काम चला रहे थे एक दिन की बात है मुखिया जी का बेटा कहीं बाहर गया था और मुखिया जी अपने बेटी का घर पर इंतजार कर रहे थे और वह यही सोच रहे थे कि गांव में पानी की समस्या को कैसे दूर किया जाए तभी मुखिया जी का बेटा आ गया और मुखिया जी ने अपने बेटे से कहा बेटा तुम्हें तो पता है इस गावं में पानी की कितनी तकलीफ है गांव में एक कुआं हुआ करता था और उस कुएं का पानी अचानक सूख गया तभी से लोग नदी से पानी लाकर के अपना गुजारा कर रहे हैं और लोग बहुत परेशान भी रहते हैं क्योंकि नदी से पानी लाने में बहुत परेशानी होती है तब मुखिया जी के बेटे ने कहा बाबूजी आप चिंता मत कीजिए मैं उस कुएं को खोद करके फिर से वहां से पानी निकाल लूंगा लेकिन मुखिया जी ने कहा बेटा उस कुवे से पानी नहीं निकलेगा तुम व्यर्थ में अपना समय बर्बाद करोगे लेकिन बेटे ने कहा पिताजी मैं उस कुएं को खोद करके देखना चाहता हूं कि आखिर अचानक पानी कैसे सूख गया हो सकता है अब कुएं में पानी वापस आ चुका हो और हम लोग कुआं दोबारा से बना दें तो सभी गांव वालों को पानी मिलने लगे और सभी लोग अच्छे से रहने लगे, मुखिया जी ने कहा ठीक है बेटा तुम्हारी मर्जी अब मुखिया जी का बेटा उस कुएं की खुदाई चालू कर दिया सभी गांव वालों ने देखा उसे उस कुएं को खोजते हुए क्योंकि जब वह पानी सूख गया था तब मुखिया जी ने उस कुएं को तूड़वा दिया था सभी लोगों ने मुखिया जी के बेटे को बहुत समझाया लेकिन वह किसी की बात नहीं माना और वह अपने काम में लगा रहा खोदते-खोदते उसे एक गोल्डन कुआं मिला सोने का कुआं और उसमें पानी भरा हुआ था मुखिया जी का बेटा देखता ही रह गया बोला सोने का कुआं यह कैसा चमत्कार है
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लेकिन उसे सोने की जरूरत नहीं थी उसे जरूरत थी पानी की इसलिए मुखिया जी का बेटा दौड़ करके अपने घर गया और वहां से एक बाल्टी लेकर आया और उस कुआँ से एक बाल्टी पानी लेकर ऊपर आया जैसे वह पानी लेकर ऊपर आया वह पानी एकदम काला पड़ चुका था और सूखने लगा उसने देखा और कहा यह कैसा चमत्कार है अभी तो वहां से मैं अच्छा पानी भर ले कर के आया था फिर वह तुरंत अंदर गया दोबारा से पानी भर कर ऊपर आया फिर से पानी सूखने लगा काला पड़ गया यह काम उसने निरंतर वह करता रहा दश से पन्दरा बार वह पानी लेकर ऊपर आया-गया लेकिन पानी हर बार सूख जाता तब वह कुएं के पास गया और हाथ जोड़ करके उस कुएं से प्रार्थना करने लगा यह पानी क्यों सूख जाता है हमारे गांव वाले पानी के लिए बहुत परेशान है हमें पानी की आवश्यकता है और आप पानी क्यों सुखा देते हो जब मैं बाल्टी में भर ले करके जाता हूं और यहां तो पानी बहुत ही अच्छा है कुएं में अचानक कुवे से आवाज आई तुम चाहते क्या हो मैं फिर से गांव वालों को पानी दूँ और तुम्हारे पिताजी ने हमें तोड़ दिया था तुम्हें तो पता ही होगा फिर भी तुम चाहते हो मैं पानी दूं कुछ दिनों पहले की बात है मैं लोगों को जब पानी देता था तब लोग पानी लेने के बजाय बहुत झगड़ा करते थे उस झगड़े से परेशान होकर मैंने अपना पानी सुखा लिया तब मुख्य जी के बेटे ने कहा आप चिंता मत करो इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा कोई भी झगड़ा नहीं करेगा मैं उन्हें समझा दूँगा और आप पानी देना चालू कर दीजिए आप महान हो उस कुएं को उस लड़के की बातें बहुत अच्छी लगी इसलिए उसने कहा तुम बाहर जाओ और लोगों को समझा दो और मैं जल्द ही ऑटोमेटिक पहले जैसा कुआं बन जाऊंगा और लोगों को पानी की कोई दिक्कत नहीं होगी मुखिया जी का बेटा बाहर आता है और सभी गांव वालों को यह बात बताता है कि खुदाई के दौरान हमें एक गोल्डन हुआ मिला है और उसने मुझसे वादा किया है कि आप लोग कभी झगड़ा नहीं करेंगे और पानी बर्बाद नहीं करेंगे अगर आप लोग सहमत हैं, कुआं आज रात को वापस आ जाएगा और आप लोगों को कल सुबह से पानी मिलना चालू हो जाएगा सभी गांव वाले खुश हो गए और नाचने गाने लगे खुशियां मनाने लगे और वह कुआं, सुबह जब गांव वाले आए तो कुआं पहले जैसा था और कुआँ में पानी भरा हुआ था, दोस्तों इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है इस कहानी से हमें सीखने को मिलता है कि हमें कभी पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए और हमें झगड़ा नहीं करना चाहिए जिस चीज की आवश्यकता हो उसका हमें महत्व समझना चाहिए दोस्तों यह था हमारा ओपिनियन इस कहानी को लिखने का और आपने इस कहानी से क्या सीखा हमें कमेंट बॉक्स के माध्यम से बता सकते हैं और हां दोस्तों ऐसी कहानियां और भी पढ़ने के लिए हमें फॉलो जरूर करें तो मिलते हैं किसी नेक्स्ट कहानी के साथ ।
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