यह कहानी एक छोटे से गांव की है उस गांव में एक छोटा सा परिवार भी रहता था मोहन और उसकी पत्नी और मीना उसकी 5 साल की बेटी है उस गांव में एक महामारी आई और उसकी मां की मृत्यु हो गई और मीना के पिता की आंख की रोशनी चली गई अब उसका पिता अंधा हो चुका था मां मर चुकी थी अब मोहन के पास एक ही रास्ता था भीख मांगने का मोहन घर-घर भीख मांगता और अपना भोजन इकट्ठा करता और दोनों पिता और पुत्री का एक-एक दिन कट रहा था
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| भिखारन बनी डॉक्टर एक प्रेरणादायक कहानी | Bhikharin Bani Doctor Ek Prernadayak Kahani |
मोहन अंधा था इसलिए वह अकेले भीख मांगने नहीं जा पाता था मोहन के साथ उसकी बेटी मीना भी जाती थी मीना को भीख मांगना अच्छा नहीं लगता था मीना का मन था कि वह अच्छे से पढ़े लिखे और एक डॉक्टर बने लेकिन मीना की मजबूरी थी की उसका पिता अंधा था एक दिन की बात है मोहन और मीना सेठानी के यहां भीख मांगने दरवाजे पर पहुंचे वहां पर एक लड़के को मीना देखती है वह किताबें पढ़ रहा था मीना अपने सपनों में खो गई उसने सोचा क्यों ना मैं भी ऐसी किताबें पढ़ पाती और अपनी डॉक्टर की पढ़ाई भी पूरी कर पाती तभी अंदर से आवाज आई कि कौन दरवाजा खटखटा रहा है अरे वही भिखारिन होंगे मोहन और उसकी बेटी अरे कुछ दे दे इन लोग का मुंह देख लेंगे तो बड़ा पाप होगा कहीं महामारी ना फैला दें बेटा इनसे दूर ही रहना यह सुनकर मीना को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा वह अपने घर गई और अपने पिताजी से कहने लगी पिताजी मैं बड़ी होकर के डॉक्टर बनूंगी फिर आपकी आंखों का इलाज भी कर दूंगी आप देखने लगेंगे पिताजी ने मीना से कहा बेटी यह बड़े लोगों के सपने हैं
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हमारे लिए तो दो वक्त की रोटी ही मिल जाए वही बहुत है यह सुनकर मीना को बहुत बुरा लगा मीना ने ठान लिया था कि मुझे डॉक्टर बनना है कैसे भी करके मीना अब खिलौना बेचने का काम करने लगी वह गांव-गांव में खिलौना बेचने लगी अब उसके पास पैसे आने लगे थे और अब मोहन को भीख मांगने की जरूरत नहीं थी उसके बाद गांव की शिक्षिका से मिलकर के मीना ने गांव के स्कूल में एडमिशन भी ले लिया मीना हर एक क्लास में फर्स्ट आती धीरे-धीरे दिल बीतता गया और मीना बड़ी हो गई मीना की स्कूल की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी उसके बाद उसकी शिक्षिका और मीना ने मिलकर के मोहन को समझाया कि अब यहां डॉक्टर की पढ़ाई के लिए इसे बाहर जाना होगा मोहन को यह मंजूर नहीं था लेकिन शिक्षिका के समझाने के बाद मोहन मान गया और मीना डॉक्टर की पढ़ाई करने के लिए चली गई कुछ दिनों बाद उस गांव में फिर से महामारी आई और सभी लोग बीमार हो चुके थे एक गांव के छोटे से हॉस्पिटल में सभी को एडमिट किया गया लेकिन वहां पर कोई अच्छा डॉक्टर ना होने के कारण सभी का इलाज अच्छे से नहीं हो रहा था तभी उस हॉस्पिटल से एक नर्स आई और उसने कहा आप लोग बहुत खुशनसीब हैं कि अभी अभी सरकार ने इस हॉस्पिटल में एक डॉक्टर को भेजा है इस शहर की वह सबसे बड़ी डॉक्टर हैं उस हॉस्पिटल के सामने एक कार आकर रूकती है उसमें से एक लेडी डॉक्टर निकलती है जब गांव वालों के सामने वाह डॉक्टर आती है
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तो सब देखते रह जाते हैं उसे क्योंकि वह वही लड़की है मीना जिसे सभी लोग ताने दे रहे थे बिखारन बोल रहे थे लेकिन उसने अपनी मेहनत से अपनी काबिलियत से आज वह शहर की सबसे बड़ी डॉक्टर बन चुकी है और उस डॉक्टर मीना ने सभी का इलाज किया और सभी लोग अच्छे हो गए और आज सभी लोग मीना का बहुत सम्मान करते हैं उसके बाद मीना ने अपने पिता की आंखों का इलाज किया और पिताजी देखने लगे मोहन आज बहुत खुश था अपनी बेटी की काबिलियत पर कि हां मेरी बेटी ने कर दिखाया उसका सपना पूरा हो गया उसकी मेहनत रंग लाई दोस्तों में उम्मीद करता हूं यह छोटी सी कहानी आपको अच्छी लगी होगी अगर अच्छी लगी है तो इस कहानी को लाइक कर दीजिए और अपने दोस्तों में इसे शेयर कर दीजिए और हां दोस्तों मैं उम्मीद करता हूं इस कहानी से आपको कुछ सीखने को जरूर मिला होगा दोस्तों मैं आपको बता देना चाहता हूं कि मुश्किल समय में भी संघर्ष करते रहना चाहिए उससे बाहर निकलने की कोशिश करते रहना चाहिए तभी आपके आने वाले भविष्य में समस्याएं कम होंगी और आप खुशहाल रहेंगे दोस्तों अगर यह कहानी अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों में शेयर कीजिए और हमें फॉलो जरूर कीजिएगा ऐसे ही कहानियां आगे भी पढ़ने के लिए ।



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