शहर की छोरी गवार आशिक | Shahar Ki Chhori Gawar Aashiq

हम इतने निकम्मे हैं कि हमसे 50 ग्राम का डिब्बा भी अकेले नहीं उठाया जाता था और अगर कहीं पता चल जाए कि हमारे गांव में सुंदर लड़की आई है तो सारा निकम्मा पन दूर भाग जाता था 

मैं उससे बात करने का एक भी तरीका नहीं छोड़ता मेरे अंदर एक चाहत सी रहती थी कि  वह मुझसे बात कब करेगी शायद यह उम्र ऐसी ही होती है जिसे सही और गलत के मायने नहीं पता होते हैं।

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आज उसने मुझे ब्लडी फूल कहा है मैं समझ नहीं पाया कि मुझे वह पसंद करती है या ना पसंद करती है क्योंकि हमें ब्लडी फूल का मतलब ही नहीं पता।

अपने गांव के पढ़े लिखे व्यक्ति से पूछा ब्लडी फूल का मतलब क्या होता है कमाल की बात तो यह थी कि उसने कहा यह हमारे कॉलेज में मिलता है।

 हम भी बेवकूफी की हद पार कर रहे थे हमने सोचा शायद उसने हमसे कोई फूल मांगा है।

शहर की छोरी  गवार आशिक  | Shahar Ki Chhori Gawar Aashiq
शहर की छोरी  गवार आशिक  | Shahar Ki Chhori Gawar Aashiq

आज हम फूल लेकर उनके पीछे पीछे जा रहे थे शायद उन्हें लगा कि कोई मेरा पीछा कर रहा है।

कमाल तो तब हुआ जब उसने पीछे मुड़कर देखा मैं घुटनों पर खड़ा हाथों में फूल लिए उनके सामने था शायद आज मैं बेवकूफी की हद पार कर रहा था।

जब उसने मुझे मुस्कुराते हुए क्यूट कहा ऐसा लग रहा था उस समय मानव दुनिया की हर खुशी मुझे मिल गई हो  बातों ही बातों में उसने मुझसे कहा तुम अपना गांव नहीं घूम आओगे मुझे

शहर की छोरी  गवार आशिक  | Shahar Ki Chhori Gawar Aashiq
शहर की छोरी  गवार आशिक  | Shahar Ki Chhori Gawar Aashiq

मैं अपना पूरा गांव उसे घुमा चुका था शाम होने वाली थी और उसके भाई का फोन आ चुका था उस ने मुस्कुराते हुए कहा नेक्स्ट टाइम मिलते हैं  कुछ ही समय में मुझे पता चला कि वह अपने घर जा रही है जब तक मैं उसके पास पहुंचता वह जा चुकी थी शायद मैं बेवकूफी की हद पार कर चुका था।

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