डरावना कब्रिस्तान सच्ची कहानी | Drawna Kabristan Sacchi Kahani

  यह बात 2012 की है जब मैं  सिलाई सीखने अपने गांव से बीस किलोमीटर दूर जाता था यह मेरा रोज का रूटिंग था रोज में सुबह आठ बजे घर से निकलता था और शाम को कभी 6:00 बजे घर पर पहुंचता था तो कभी 7:00 बजे और कभी बहुत लेट हो जाता था तो 9:00 से 10:00 बजे तक मैं अपने घर पर आ जाता था या सिलसिला रोज का मेरा था लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मैं सुबह घर से 7:00 बजे निकल गया सिलाई सीखने के लिए वापस मुझे आने में लेट हो गया

डरावना कब्रिस्तान सच्ची कहानी | Drawna Kabristan Sacchi Kahani
 डरावना कब्रिस्तान सच्ची कहानी | Drawna Kabristan Sacchi Kahani

क्योंकि उस समय लग्न का सीजन था और कपड़े ज्यादा दुकान पर आए थे सिलने के लिए तो मैं ओवर टाइम लगा दिया 2 घंटे का हमें आने में लेट हो गया मास्टर जी ने कहा कि आप आज दुकान पर ही रुक जाइए क्योंकि काफी लेट हो गया है रात के 9:00 बज चुके हैं  मैंने मास्टर जी से कहा कोई बात नहीं मैं घर चला जाऊंगा आराम से मैंने वहां से 9:00 बजे अपनी साइकिल उठाई और घर के लिए निकल गया 20 किलोमीटर का रास्ता था घर आने के लिए तो 20 किलोमीटर में हमें साइकिल से 2 घंटे आने के लिए लगते थे तकरीबन 11:00 बजे तक मैं घर पर पहुंच जाता अगर मैं सही से साइकिल चला करके आता लेकिन काफी रात हो चुकी थी मुझे रात में डर तो नहीं लगता था लेकिन मेरे गांव के पास में एक बड़ा सा कब्रिस्तान है मुझे वहां पर बहुत डर लगता था और उस दिन जब मैं सुबह घर से गया था तब मेरी गांव की एक बूढ़ी औरत  मर गई थी और जब मैं वापस लौट रहा था उस कब्रिस्तान वाले रास्ते से तो मुझे ऐसा लग रहा था कि वह बुढ़िया मेरे सामने खड़ी है मैं बहुत घबरा गया था एक बार तो
डरावना कब्रिस्तान सच्ची कहानी | Drawna Kabristan Sacchi Kahani
 डरावना कब्रिस्तान सच्ची कहानी | Drawna Kabristan Sacchi Kahani

ऐसा लगा कि कोई मेरे सामने से कोई आ रहा है और कभी मुझे ऐसा लगता कि पीछे से कोई मुझे दौड़ा रहा है और मैं साइकिल बहुत तेजी से चलाता हुआ आ रहा था तभी मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे सामने आ गया मैंने तुरंत अपनी साइकिल रोकी मैंने देखा तो हमारे गांव के एक चाचा जी वहां से गुजर रहे थे मेरी जान में जान आ गई मैंने उनसे कहा चाचा जी इतनी रात को आप कहां जा रहे हैं उन्होंने बताया कि बेटा मुझे लौटने में देर हो गई मार्केट गया था और घर जा रहा हूं अभी तुम मिल गए तो मुझे भी ले चलो अपनी साइकिल से और मैं उन्हें साइकिल से लेकर के घर पर उनको भी पहुंचा दिया और मैं भी अपने घर पर आ गया या मेरी भयानक रात बहुत डरावनी थी वैसे तो मुझे उस कब्रिस्तान से गुजर ना मौत के समान ही लगता था इसीलिए मैं बहुत जल्दी घर वापस आ जाता था क्योंकि उस समय में करीब 16 साल का था इस उमर में सभी को डर लगता ही है क्योंकि इतनी समझ नहीं होती है और गांव में भूत प्रेत में लोगों की ज्यादा ही मान्यता है लोग ज्यादा ही मानते हैं इसलिए मुझे डर बहुत लगता था लेकिन आज मैं नहीं डरता बिल्कुल भी नहीं क्योंकि मैं बड़ा हो चुका हूं और जो कब्रिस्तान था भयानक दिखता था वह भी बदल चुका है वहां से जो पेड़ पौधे बड़े बड़े थे जंगल जैसे वह सब हटा दिए गए हैं कई लोग वहां पर दुकानें भी खोली है सड़क के किनारे इसके लिए डर उतना नहीं लगता है दोस्त यह छोटी सी कहानी आपको कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स के माध्यम से बता सकते हैं और ऐसी कहानियां आगे पढ़ने के लिए हमें फॉलो जरूर करें ।

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