एक बार की बात है आचार्य चाणक्य अपने शिष्य के साथ एक जंगल के रास्ते से गुजर रहे थे अचानक आचार्य चाणक्य को प्यास लगी क्योंकि गर्मी का समय था धूप बहुत तेज थी और जंगल का रास्ता काफी लंबा था चलते-चलते आचार्य चाणक्य को प्यास लग गई आचार्य चाणक्य ने अपने शिष्य से कहा कि मुझे प्यास लगी है देखो कहीं आस पास कोई नदी या तालाब हो तो वहां से पानी लेकर के आ जाओ शिष्य ने कहा आचार्य मुझे भी प्यास लगी है मैं अभी आपके लिए पानी लेकर के आता हूं।
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| शांत मन से सोचो मोटिवेशनल स्टोरी Motivational Story in Hindi |
आप इस पेड़ के नीचे बैठिये और मैं अभी आता हूं शिष्य पानी की खोज में निकल गया कुछ दूर जाने के बाद उस शिष्य को एक झरना दिखाई दिया झरने से पानी गिर रहा था तभी वह झरने के पास पहुंचता है और पानी वह भरने ही वाला होता है तभी कुछ जानवर आ जाते हैं और उस पानी को पूरा मैला कर देते हैं पानी पुरी तरह से कीचड़ की तरह हो जाता है पानी अब पीने लायक नहीं रहता है शिष्य को बहुत गुस्सा आता है लेकिन वह कुछ नहीं कर सकता था जानवर पानी पिए और चले गए पानी पूरा गंदा हो चुका था अब शिष्य आचार्य चाणक्य के पास आया और उन्हें सारी बातें बताई आचार्य चाणक्य ने कहा कोई बात नहीं, शिष्य दूसरी दिशा में चला गया लेकिन उसे पानी नहीं मिला शिष्य वापस आचार्य चाणक्य के पास आ गया और आचार्य चाणक से कहा आचार्य पानी मैंने तीनों दिशाओ में ढूंढा लेकिन आसपास कोई भी झील कोई भी तालाब नहीं है।
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फिर आचार्य चाणक्य ने कहा वापस जाओ जिस झड़ने पर आप गए थे वहां पर जाओ देखो पानी साफ हुआ होगा फिर से शिष्य जाना तो नहीं चाहता था लेकिन आचार्य चाणक्य के कहने पर गया झरने के पास पहुंचा तो पानी गंदा था आचार्य चाणक्य के पास वापस आ गया और आचार्य चाणक्य को सारी बातें बताई आचार्य चाणक्य ने कहा तुम भी थोड़ा आराम कर लो पानी ढूंढ करके बहुत थक गए हो शिष्य आराम किया उसके बाद आचार्य चाणक्य ने शिष्य से कहा कि जाओ झरने से पानी भर लाओ शिष्य ने कहा आचार्य उस झरने का पानी बिल्कुल ही गंदा है।
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उस पानी को हम पी नहीं सकेंगे तब आचार्य चाणक्य ने कहा तुम जाकर के पानी भर लाओ वह पानी अब साफ हो गया है इतना सुनने के बाद वह शिष्य ना चाहते हुए भी झरने के पास गया और जाकर के देखा तो पूरा पानी बिल्कुल स्वक्ष और शुद्ध था यह देख कर के वह शिष्य आश्चर्य में था कि ऐसा कैसे हो सकता है तब आचार्य चाणक्य ने बताया जब भी हम परेशानियों में होते हैं उलझन में होते हैं हमें कुछ समझ नहीं आता तब हमें शांत और स्थिर मन से सोचना चाहिए।
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अपने आप को एकांत करना चाहिए जब हम शांति से सोच सकें जब हम शांति से सोचेंगे तो उसी तरह जिस तरह पानी से कीचड़ अलग होकर के बह गया नीचे जम गया उसी तरह आपके दिमाग से बेकार की चीजें निकल जाएंगी और अच्छी चीजें दिखने लगेंगी दोस्तों इस कहानी से आप सभी लोगों को क्या सीखने को मिला आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा और ऐसी ही और भी कहानियां सुनने के लिए आप हमें फॉलो करना बिल्कुल भी ना भुलें।




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